सपना टूटे पंखवाली तितली की……

सपनों की हाथ पकड़ कर

चलने की ज़िद कर रही है ये मन

ज़िंदगी की उन राहो में जहाँ

हर एक चेहरे में देखी मैंने एक कहानी

हर एक मुस्कान पे चुपी है

एक ज़िंदगी की चेहरा।

उड़ना चाहती है उस

अनजान राहो में

मंज़िल की परवाह ना करते हुए

जिंदगी एक सफर है

हर कोई एक मुसाफ़िर भी…….।

ये मेरी पहली हिंदी कविता है इसलिए तोड़ी-तोड़ी गलतियाँ होगी

उस गलतियों को आप कृपया माफ कीजिये ……।
Picture: google

22 thoughts on “सपना टूटे पंखवाली तितली की……

  1. बहुत ख़ूब !!!! लिखती रहो हिंदी में भी . ग़लतियाँ तो सब करते है . मैं भी ग़लतियाँ करने में expert हूँ .

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  2. I loved this – हर एक चेहरे में देखी मैंने एक कहानी – So true ! Keep posting. Your readers like me love them. Regards. Jay

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  3. लिखते रहिये ।खूबसूरत लेखन।
    हर चुप्पी में एक राज है,
    कितनो को गिरते देखा
    फिर भी उड़ने की चाह है।

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